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जगदलपुर, 22 अक्टूबर। रियासत कालीन बस्तर दशहरा की परंपराओं को लेकर मांझी-चालकी समाज में नाराजगी के बीच बस्तर दशहरा समिति के उपाध्यक्ष बलराम मांझी एवं बस्तर धाकड़ क्षत्रिय राजपूत समाज के संरक्षक कुमार जयदेव ने रियासत कालीन बस्तर दशहरा की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार मनाने और राजनीति से दूर रखने की अपील की है।
कुमार जयदेव ने गुरुवार काे मीडिया से कहा कि बस्तर दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि बस्तर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और सदियों पुरानी परंपरा का प्रतीक है। मांझी-चालकी वर्षों से इस परंपरा से जुड़े हुए हैं। ऐसे में उनकी आड़ में राजनीति करना और परंपराओं में बदलाव का प्रयास करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा की परंपराओं का संरक्षण होना चाहिए और इसे राजनीतिक हितों से दूर रखा जाना चाहिए।
वहीं बस्तर दशहरा समिति के उपाध्यक्ष बलराम मांझी ने भी बस्तर दशहरा को परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार मनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा की विशिष्टता उसकी परंपराओं और पारंपरिक व्यवस्थाओं में है। इसे बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
दरअसल, बस्तर दशहरा की परंपराओं और व्यवस्थाओं में बदलाव के प्रयासों को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है। आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोग राजनीतिक प्रभाव के जरिए परंपराओं में बदलाव करने का प्रयास कर रहे हैं। इससे मांझी-चालकी नाराज बताए जा रहे हैं। ऐसे माहौल में दोनों की अपील को बस्तर दशहरा की पारंपरिक व्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखने के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।