ममता ने स्वच्छता को बनाया आजीविका का जरिया

Posted on: 2026-09-11


विकासखण्ड लोरमी के ग्राम हरनाचाका की श्रीमती ममता राजपूत ने अपने कार्यों से सार्थक कर दिखाया है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तहत घर-घर कचरा संग्रहण और उसके उचित प्रबंधन को अपनाकर ममता गांव की स्वच्छता में महत्वपूर्ण योगदान देने के साथ ही अपने परिवार की आजीविका भी चला रही हैं। ग्राम पंचायत हरनाचाका में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन कार्य के तहत संचालित गतिविधियों से जुड़कर ममता ने स्वच्छता को अपनी जिम्मेदारी के साथ-साथ रोजगार का माध्यम बनाया। एकता महिला समूह की सक्रिय स्वच्छाग्राही सदस्य के रूप में वे पिछले दो वर्षों से लगातार स्वप्रेरणा से घर-घर कचरा कलेक्शन का कार्य कर रही हैं। सुबह गांव की गलियों में निकलकर घर-घर से कचरा एकत्र करना अब उनके दैनिक कार्य का हिस्सा बन चुका है। वे ग्रामीणों को भी कचरा इधर-उधर न फेंकने तथा उसे निर्धारित तरीके से संग्रहित करने के लिए प्रेरित करती हैं। उनके इस प्रयास से गांव में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ-साथ कचरे के व्यवस्थित प्रबंधन को भी बढ़ावा मिल रहा है।
    श्रीमती ममता ने बताया कि वह केवल कचरा एकत्र करने तक सीमित नहीं रहती, वह सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग रखने के लिए ग्रामीणों को प्रेरित करती हैं। घरों से प्राप्त सूखे कचरे को व्यवस्थित रूप से एकत्र कर उसका उचित प्रबंधन किया जाता है। कलेक्शन एवं सेग्रीगेशन के पश्चात प्राप्त ठोस कचरे को बेचकर उन्हें प्रतिमाह लगभग 03 से 04 हजार रूपये तक की आय प्राप्त हो रही है। यह आय उनके लिए आर्थिक संबल का महत्वपूर्ण माध्यम बनी है। ममता इस कार्य से अपने और अपने परिवार के जीवन-यापन में सहयोग कर रही हैं। इस तरह जो कचरा कभी गांव की गंदगी का कारण बनता था, वही अब उनके लिए आजीविका और आत्मनिर्भरता का साधन बन गया है। श्रीमती ममता बाई के लिए घर-घर कचरा संग्रहण महज एक काम नहीं, बल्कि स्वच्छ गांव के निर्माण के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ता कदम है।